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બંદિશ એક રૂપ અનેક (૫૪) – કબીરજી નું ભજન "घूँघट के पट खोल" : રાગ: " જ્યુથિકા રોય"

નીતિન વ્યાસ ભજનના શબ્દો છેઃ घूँघट का पट खोल रे, तोको पीव मिलेंगे।घट-घट मे वह सांई रमता, कटुक वचन मत बोल रे॥तोको पीव मिलेंगे। धन जोबन का गरब न कीजै, झूठा पचरंग चोल रे।सुन्न महल मे दियना बारिले, आसन सों…